Car Industry Outlook 2026: कार खरीदना अब मिडिल क्लास की पहुंच से बाहर? स्टील की कीमतों और नए एमिशन नॉर्म्स ने बढ़ाई मुश्किलें
मुंबई: भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग इस समय एक दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ जहां ग्राहकों की प्राथमिकताएं एसयूवी (SUV) की तरफ बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कारों की निर्माण लागत इतनी बढ़ गई है कि एंट्री-लेवल कारें भी अब महंगी लगने लगी हैं। मारुति सुजुकी से लेकर मर्सिडीज-बेंज तक, सभी कंपनियों ने साल 2026 की दूसरी तिमाही में कीमतों में संशोधन करने का मन बना लिया है।
कच्चे माल की कीमतों का दबाव कार बनाने में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला घटक स्टील है। पिछले छह महीनों में स्टील और एल्युमीनियम की वैश्विक कीमतों में 12 से 18 प्रतिशत का उछाल आया है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बढ़ते चलन के कारण लिथियम और कोबाल्ट जैसी दुर्लभ धातुओं की मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर पैदा हो गया है। कंपनियों का तर्क है कि सेमीकंडक्टर चिप्स की समस्या अब काफी हद तक सुधर चुकी है, लेकिन अब धातुओं की महंगाई उनकी बैलेंस शीट को बिगाड़ रही है।
सख्त उत्सर्जन मानक (BS-7) और सुरक्षा नियम भारत सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए और भी सख्त उत्सर्जन मानक लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इन मानकों को पूरा करने के लिए कंपनियों को अपने इंजन डिजाइन में बड़े बदलाव करने पड़ रहे हैं, जिसमें भारी निवेश की आवश्यकता है। साथ ही, अब कारों में 6 एयरबैग्स और अन्य एडवांस सेफ्टी फीचर्स को अनिवार्य बनाने की प्रक्रिया ने बेस मॉडल्स की कीमत में भी 50,000 से 80,000 रुपये तक का इजाफा कर दिया है।
सेकंड हैंड मार्केट में उछाल नई कारों की कीमतें बढ़ने का सीधा असर ‘यूज्ड कार’ यानी पुरानी कारों के बाजार पर दिख रहा है। मध्यम वर्गीय परिवार अब 10 लाख रुपये में नई छोटी कार खरीदने के बजाय उसी बजट में अच्छी कंडीशन वाली पुरानी एसयूवी खरीदना पसंद कर रहे हैं। इससे पुरानी कारों की रीसेल वैल्यू में भी 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है।
निष्कर्ष ऑटो एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑटो सेक्टर में यह महंगाई का दौर अभी कम से कम एक साल तक जारी रहेगा। हालांकि, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलने वाली सब्सिडी ग्राहकों के लिए थोड़ी राहत का काम कर रही है, लेकिन पेट्रोल-डीजल कारों के शौकीनों के लिए जेब ढीली करना तय है।
