Real Estate Boom vs Inflation: आसमान छूती जमीन की कीमतें और निर्माण लागत; क्या 2026 में घर खरीदने का फैसला सही है?
गुरुग्राम: भारत के मेट्रो शहरों में रियल एस्टेट की कीमतें इस समय अपने रिकॉर्ड स्तर पर हैं। गुरुग्राम, नोएडा, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में पिछले एक साल में प्रॉपर्टी की दरों में 25 से 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। लेकिन क्या यह केवल मांग के कारण है? इसका जवाब निर्माण सामग्री (Construction Material) की बढ़ती कीमतों में छिपा है।
सीमेंट और स्टील का ‘प्राइस कार्टेल’ डेवलपर्स का आरोप है कि सीमेंट और सरिया बनाने वाली कंपनियों ने कीमतों को कृत्रिम रूप से ऊंचा बनाए रखा है। एक तरफ जहां इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण मांग तेज है, वहीं दूसरी तरफ कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला देकर सीमेंट की बोरी पर 50 से 70 रुपये बढ़ा दिए गए हैं। क्रेडाई (CREDAI) के मुताबिक, अगर निर्माण लागत इसी तरह बढ़ती रही, तो अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पूरी तरह से बंद हो सकते हैं क्योंकि उनमें मार्जिन बहुत कम होता है।
होम लोन की ब्याज दरें और ईएमआई का बोझ रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में की गई पिछली बढ़ोतरी का असर अब होम लोन की ईएमआई पर साफ दिख रहा है। जहां दो साल पहले 7% पर लोन मिल रहा था, अब वह 9% के पार पहुंच चुका है। इससे खरीदारों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) कम हुई है। लोग अब बड़े 3BHK फ्लैट्स के बजाय कॉम्पैक्ट 2BHK या स्टूडियो अपार्टमेंट्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
नए हॉटस्पॉट्स और निवेश की संभावनाएं महंगाई के बावजूद, टियर-2 और टियर-3 शहरों जैसे इंदौर, लखनऊ और जयपुर में रियल एस्टेट निवेश का नया केंद्र बन रहे हैं। यहां जमीन की कीमतें अभी भी पहुंच के भीतर हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट तेजी से हो रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबी अवधि के निवेश के लिए ये शहर दिल्ली या मुंबई के मुकाबले बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।
निष्कर्ष रियल एस्टेट में निवेश करने वालों के लिए सलाह है कि वे केवल रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी पर ही ध्यान दें, क्योंकि निर्माणाधीन (Under-construction) प्रोजेक्ट्स में लागत बढ़ने के कारण पजेशन में देरी होने की संभावना बढ़ गई है।
