ई-कॉमर्स और डिजिटल इकोनॉमी
E-commerce Policy 2026: ऑनलाइन शॉपिंग के नियमों में बड़ा बदलाव; डार्क पैटर्न और फेक रिव्यूज पर सरकार की स्ट्राइक, ग्राहकों को मिलेगा बड़ा फायदा
नई दिल्ली: अगर आप भी उन करोड़ों भारतीयों में से हैं जो कपड़ों से लेकर ग्रोसरी तक सब कुछ ऑनलाइन मंगवाना पसंद करते हैं, तो 2026 आपके लिए एक सुरक्षित साल होने वाला है। भारत सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए नई ‘कंज्यूमर प्रोटेक्शन नियमावली’ को और सख्त कर दिया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स पर होने वाली धोखाधड़ी, भ्रामक विज्ञापनों और ‘डार्क पैटर्न्स’ (Dark Patterns) को पूरी तरह से खत्म करना है।
क्या हैं ‘डार्क पैटर्न्स’ और आप पर इनका असर? इंटरनेट की दुनिया में डार्क पैटर्न उन चालाकियों को कहा जाता है जिसका इस्तेमाल कंपनियां ग्राहकों को अनचाही चीजें खरीदने या सब्सक्राइब करने के लिए मजबूर करने के लिए करती हैं। उदाहरण के लिए, चेकआउट के समय चुपके से ‘इंश्योरेंस’ या ‘डोनेशन’ का चार्ज जोड़ देना, या ‘केवल 2 आइटम बचे हैं’ जैसा फर्जी डर दिखाना। वाणिज्य मंत्रालय के नए आदेश के अनुसार, अब अमेज़न, फ्लिपकार्ट और अन्य क्विक-कॉमर्स (जैसे ब्लिंकिट, जेप्टो) को अपनी वेबसाइट के डिजाइन में पारदर्शिता लानी होगी। अगर कोई कंपनी दोषी पाई जाती है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
फेक रिव्यूज (Fake Reviews) पर लगाम ऑनलाइन खरीदारी करते समय हम अक्सर रिव्यूज देखकर फैसला लेते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में ‘पेड रिव्यूज’ का धंधा जोरों पर था। 2026 के नए नियमों के तहत, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को अब रिव्यूज को वेरिफाई करना अनिवार्य होगा। अब कंपनियां केवल उन्हीं रिव्यूज को टॉप पर नहीं रख पाएंगी जो उनकी तारीफ करते हों। ग्राहकों को यह जानने का हक होगा कि कौन सा रिव्यू वास्तविक खरीदार ने दिया है और कौन सा स्पॉन्सर्ड है।
क्विक-कॉमर्स की जंग और डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा 10-minute डिलीवरी के बढ़ते चलन ने शहरों में ट्रैफिक और एक्सीडेंट्स के खतरे को बढ़ा दिया है। सरकार ने अब इन कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे डिलीवरी पार्टनर्स पर ‘समय का दबाव’ (Time Pressure) न डालें। इसके अलावा, डिलीवरी एजेंट्स के लिए ‘गिग वर्कर्स सोशल सिक्योरिटी’ फंड की शुरुआत की गई है, जिसमें कंपनियों को अपने मुनाफे का एक हिस्सा जमा करना होगा।
निष्कर्ष और ग्राहकों के लिए टिप नियमों के सख्त होने से ऑनलाइन फ्रॉड में कमी आएगी, लेकिन ग्राहकों को अभी भी सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान लिंक या भारी डिस्काउंट वाले लुभावने मैसेज पर क्लिक करने से बचें। हमेशा वेरिफाइड ऐप्स का ही इस्तेमाल करें और भुगतान के लिए सुरक्षित गेटवे चुनें।
