Agri-Tech Revolution 2026: खेती में ड्रोन और एआई का बढ़ता दखल; किसानों की आय दोगुनी करने के लिए नई तकनीकों का सहारा
लखनऊ/चंडीगढ़: भारत एक कृषि प्रधान देश है, लेकिन 2026 में खेती का पारंपरिक स्वरूप पूरी तरह बदल रहा है। अब खेतों में केवल हल और ट्रैक्टर ही नहीं, बल्कि ड्रोन और सेंसर्स भी नजर आ रहे हैं। ‘एग्रो-टेक’ स्टार्टअप्स और सरकारी पहलों ने मिलकर भारतीय किसानों को तकनीक से लैस कर दिया है, जिससे न केवल पैदावार बढ़ी है बल्कि खेती की लागत में भी कमी आई है।
ड्रोन से छिड़काव और सॉइल टेस्टिंग सरकार की ‘ड्रोन दीदी’ और ‘ड्रोन शक्ति’ योजना के तहत अब ग्रामीण इलाकों में भी खाद और कीटनाशकों का छिड़काव ड्रोन के जरिए हो रहा है। इससे पहले जहां घंटों का समय और भारी मात्रा में रसायनों की खपत होती थी, वहीं अब चंद मिनटों में सटीक छिड़काव संभव है। इसके अलावा, आईओटी (IoT) सेंसर्स के जरिए मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों की रियल-टाइम जानकारी किसानों के मोबाइल पर उपलब्ध है, जिससे पानी की बचत हो रही है।
स्मार्ट कोल्ड स्टोरेज और सप्लाई चेन भारतीय कृषि की सबसे बड़ी समस्या खराब होने वाली फसलों (Perishable Goods) का रख-रखाव रही है। 2026 में सोलर पावर्ड कोल्ड स्टोरेज और ब्लॉकचेन आधारित सप्लाई चेन ने इस समस्या का समाधान निकाला है। अब किसान अपनी फसल को सीधे मंडियों के बजाय ‘ई-नाम’ (e-NAM) पोर्टल के जरिए देश के किसी भी कोने में अच्छे दाम पर बेच पा रहे हैं।
निष्कर्ष कृषि में तकनीक का समावेश ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल रहा है। युवाओं का रुझान अब खेती की तरफ फिर से बढ़ रहा है, क्योंकि अब यह केवल मेहनत का काम नहीं बल्कि एक ‘प्रॉफिटेबल बिजनेस’ बनता जा रहा है। सरकार को अब सिंचाई के आधुनिक साधनों पर और अधिक निवेश करने की जरूरत है।
