कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स
AC-Fridge Price Hike 2026: भीषण गर्मी से पहले ही ठंडा पड़ा एसी का बाजार; कच्चे माल और गैस किल्लत से 15% तक बढ़ सकते हैं दाम
नई दिल्ली: भारत में गर्मियों का सीजन दस्तक दे चुका है, लेकिन इस बार ठंडी हवा देने वाले उपकरणों का बाजार गर्म है। मार्च के महीने में जहां आमतौर पर शोरूम्स में एसी और फ्रिज खरीदने वालों की भीड़ उमड़ती थी, वहां इस बार सन्नाटा और चिंता का माहौल है। मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती इनपुट लागत और सप्लाई चेन की बाधाओं ने कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में एयर कंडीशनर (AC) और रेफ्रिजरेटर की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हो सकती है।

मौसम का बदला मिजाज और शुरुआती बिक्री पर ब्रेक इस साल मार्च की शुरुआत में देश के उत्तर और पश्चिम हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश ने कंपनियों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। गोदरेज और हायर जैसी बड़ी कंपनियों ने मार्च के लिए जो सेल्स टारगेट रखे थे, वे फिलहाल पूरे होते नहीं दिख रहे हैं। आमतौर पर होली के आसपास से एसी की मांग में तेजी आती है, लेकिन सुहाने मौसम ने ग्राहकों को खरीदारी टालने पर मजबूर कर दिया है। हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि अप्रैल के दूसरे हफ्ते से लू (Heatwave) का प्रकोप बढ़ेगा, जिससे डिमांड में अचानक उछाल आ सकता है। लेकिन असली समस्या डिमांड की नहीं, बल्कि सप्लाई और बढ़ती लागत की है।
पश्चिम एशिया का तनाव और प्लास्टिक की महंगाई एसी और फ्रिज की कीमतों में उछाल का एक बड़ा कारण भौगोलिक-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव है। पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी अस्थिरता के कारण कच्चे तेल और उससे जुड़े उत्पादों की कीमतों में आग लगी हुई है। एक औसत वॉशिंग मशीन या फ्रिज के निर्माण में लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा प्लास्टिक और पॉलीमर का होता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से इनपुट कॉस्ट सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। कंपनियों का कहना है कि वे अब तक इस बोझ को खुद झेल रही थीं, लेकिन अब इसे ग्राहकों पर डालना उनकी मजबूरी बन गई है।
एलपीजी की किल्लत और उत्पादन में कटौती एक और तकनीकी समस्या जो सामने आई है, वह है औद्योगिक एलपीजी (LPG) की सप्लाई। सरकार ने घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देते हुए उद्योगों को मिलने वाली गैस की सप्लाई में 15 से 20 प्रतिशत की कटौती कर दी है। एसी के कॉपर पाइप्स को वेल्ड करने और अन्य महत्वपूर्ण निर्माण प्रक्रियाओं में एलपीजी का भारी इस्तेमाल होता है। हायर इंडिया के अध्यक्ष एन. एस. सतीश के अनुसार, यदि गैस की यह किल्लत बनी रहती है, तो पीक सीजन में उत्पादन में 30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। इससे बाजार में स्टॉक की कमी होगी और मांग बढ़ने पर कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।
निष्कर्ष और ग्राहकों के लिए सुझाव कंपनियों ने 1 अप्रैल से नई मूल्य सूचियां लागू करने के संकेत दिए हैं। गोदरेज ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा लेबलिंग के नए नियमों के कारण जनवरी में कीमतें बढ़ी थीं, और अब लॉजिस्टिक्स खर्च के कारण अप्रैल में फिर से दाम बढ़ेंगे। ऐसे में ग्राहकों के लिए सलाह है कि वे कीमतों में बढ़ोतरी से पहले ही अपनी खरीदारी पूरी कर लें, क्योंकि आने वाले दिनों में न केवल दाम बढ़ेंगे बल्कि पसंदीदा मॉडल्स की उपलब्धता भी कम हो सकती है।
