Study Abroad 2026: विदेश में पढ़ाई का सपना हुआ महंगा; डॉलर की मजबूती और वीजा नियमों में बदलाव ने बढ़ाई छात्रों की मुश्किल
मुंबई/बेंगलुरु: भारतीय छात्रों के बीच विदेश जाकर पढ़ाई करने का क्रेज हमेशा से रहा है, लेकिन 2026 में यह सपना काफी खर्चीला साबित हो रहा है। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में शिक्षा की लागत और रहने का खर्च पिछले पांच सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने ट्यूशन फीस के बजट को 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है।
वीजा नियमों में सख्ती और वर्क परमिट की चुनौती हाल के महीनों में कनाडा और यूके जैसे देशों ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए वीजा नियमों को कड़ा किया है। ‘स्टुडेंट वीजा’ प्राप्त करने के लिए अब बैंक बैलेंस की शर्तें और अधिक सख्त कर दी गई हैं। साथ ही, पढ़ाई के बाद मिलने वाले वर्क परमिट (Post-Study Work Visa) की अवधि और शर्तों में बदलाव के कारण छात्र अब वैकल्पिक देशों जैसे जर्मनी, फ्रांस और आयरलैंड की ओर रुख कर रहे हैं, जहां शिक्षा सस्ती है और नियम थोड़े लचीले हैं।
एजुकेशन लोन का बढ़ता बोझ बैंकों द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण एजुकेशन लोन लेना भी अब महंगा हो गया है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए लोन की ईएमआई चुकाना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। हालांकि, कई विदेशी यूनिवर्सिटीज अब भारतीय छात्रों को लुभाने के लिए विशेष स्कॉलरशिप और फाइनेंशियल एड (Financial Aid) की पेशकश कर रही हैं।
निष्कर्ष विदेश जाने की योजना बना रहे छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे केवल यूनिवर्सिटी की रैंकिंग न देखें, बल्कि उस देश की आर्थिक स्थिति और जॉब मार्केट का भी अध्ययन करें। 2026 का ट्रेंड बताता है कि ‘हाइब्रिड लर्निंग’ (आधा कोर्स ऑनलाइन और आधा कैंपस में) पैसे बचाने का एक अच्छा जरिया बन सकता है।
